Thursday, 16 February 2012

meri kavita....

समाज मै अलग होना चाहता हूँ इस समाज से ,इसकी परिभाषा से ,इसकी पाबंदियो से,इसकी विकलांगता से,जो खाए जा रहा है मुझे दिन-प्रतिदिन अपने प्रतिमानों से,अपने आयामों से,अपने नियमो से,मै बध सा गया हूँ उड़ना चाहता हूँ पर नहीं उड़ने देता समाज सदियों से चली रही सभ्यता, संस्कृति के नाम पर क्योंकि उनको उस पर गर्व है

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