Tuesday, 30 July 2013


भारतीय सत्ता को लेकर लिखी गई रघुवीर सहाय की यह कविता आज ज्यादा प्रासंगिक नज़र आती है।  
                                                                     मॉडरेटर

 आपकी हँसी / रघुवीर सहाय 
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निर्धन जनता का शोषण है

कह कर आप हँसे

लोकतंत्र का अंतिम क्षण है

कह कर आप हँसे

सबके सब हैं भ्रष्टाचारी


कह कर आप हँसे


चारों ओर बड़ी लाचारी


कह कर आप हँसे


कितने आप सुरक्षित होंगे


मैं सोचने लगा


सहसा मुझे अकेला पा कर


फिर से आप हँसे






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